"वात्सल्य की मूरत साध्वी ऋत्मभरा जी"
वृंदावन की तपोस्थली पर लगभग 54 एकड़ परिसर में फैला हुआ माँ "साध्वी ऋतंभरा जी" का 'वात्सल्य ग्राम' आश्रम है जहां वास्तव में वात्सल्य बरसता है।
आश्रम के विशाल दरवाजे के बाईं ओर एक पालना है!
जहां कोई भी व्यक्ति, किसी भी समय अनचाहा या अनाथ शिशु को रखकर जा सकता है!🙏
पालने में बच्चा छोड़कर जाने वाले व्यक्ति को आश्रम से संबंधित सदस्य किसी भी प्रकार का प्रश्न नहीं पूछता!
पालने में कोई बच्चा रखते ही पालने पर लगा सेंसर आश्रम के व्यवस्थापन को इसकी सूचना देता है और आश्रम का कोई अधिकारी आकर उस बच्चे को आश्रम ले आता है!
आश्रम में प्रवेश होते ही वह बच्चा वात्सल्य ग्राम परिवार का सदस्य हो जाता है। उसके बाद उसे वहीं वातावरण मिलता है जो एक सभ्य परिवार में बालक को मिलता है।
अब वह अनाथ नहीं कहलाता!
उसे आश्रम में ही माँ, मौसी, दादा-दादी; सब रिश्तेदार मिल जाते हैं!
इसके बाद सुगम वातावरण में लालन-पालन, सीबीएसई के माध्यम से शिक्षा,प्राकृतिक चिकत्सा, योग,रुचि अनुसार अध्ययन, मिलिट्री ट्रेनिंग सब देते हुए उसकी शादी तक करवाई जाती है!
ये है सनातन दर्शन ..🚩🙏
सकारात्मकता का प्रचार-प्रसार करना हम सब का परमकर्तव्य है और इसी कर्तव्य पथ पर एक कड़ी से दूसरी कड़ी को जोड़ते हुए हम सब वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को चरितार्थ करते रहें 🙏🏻
आपका ही
रवि🙏🏻
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