वाराणसी का "रत्नेश्वर महादेव मंदिर"
आध्यात्म और भक्ति से परिपूर्ण 84 घाटों वाली भगवान शिव की नगरी वाराणसी अपने आप में परिपूर्ण है किन्तु लगभग 400 वर्ष पुराना रत्नेश्वर महादेव का मन्दिर यहां की प्रसिद्धि को चार चांद लगा देता है।
विश्व प्रसिद्ध पीसा की मीनार मात्र 4° झुकी हुई है जबकि ये मन्दिर 9° झुका हुआ है जबकि ये गंगा नदी की तलहटी में बना हुआ है।
मणिकर्णिका घाट पर स्थित इस मन्दिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई की दासी रत्नाबाई ने करवाया था। यहीं कारण है कि इस मंदिर का नाम दासी रत्नाबाई के नाम पर रत्नेश्वर महादेव मंदिर रखा गया।
इस मन्दिर के झुका हुआ होने के बारे में अनेक किंवदंतियां प्रचलित हैं किन्तु विशाल ऊंचाई और वजन होने के बाद भी 9 डिग्री झुकाव पर टिका रहना आश्चर्य का विषय है।
मां गंगा की तलहटी में होने के कारण यह मंदिर लगभग 8 से 9 माह तक जलभराव में ही रहता है और इस मंदिर का शिवलिंग जमीन से लगभग 10 फीट नीचे है।
गुजरात शैली में बना स्तम्भों से युक्त संपूर्ण मंदिर नक्काशीदार पत्थरों से बना हुआ है जो देश और विदेशों तक एक आश्चर्यजनक दर्शनीय स्थल बना हुआ है।

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