"मेरी मातृभाषा-मेरा गौरव"
प्रिय पाठकों सर्वप्रथम आप सभी को मातृभाषा के पर्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻
माता-पिता के बाद एक भाषा ही जो हमको भौतिक जगत में सम्प्रेषण के लिए एक प्रबल माध्यम बनती है।
किन्तु मातृभाषा हिंदी हो तो परम सौभाग्य बन जाता है जो वास्तविक रुप से माँ के समान पोषण प्रदान करती है।
*हिंदी भाषा की विशेषताएं*
१.हिंदी वर्णमाला विशाल रूप में होने के बाद भी संसार की सबसे व्यवस्थित वर्णमाला है जिसमें उच्चारण स्थान भी क्रमबद्ध है।
१.हिंदी में स्वर और व्यंजन को अलग-अलग व्यवस्थित किया गया है।
३. हिंदी की वर्णमाला ध्वन्यात्मक है जिसमें प्रत्येक ध्वनि के लिए अलग-अलग चिह्न हैं तथा हिंदी में जो बोल सकते हैं वो ज्यों कि त्यों लिपिबद्ध किया जा सकता है।
४.हिंदी एक भावनात्मक भाषा है जिसमें विशालतम शब्दकोश निहित है तथा एक ही अर्थ के लिए भावों के अनुसार भिन्न-भिन्न शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
५. जो शब्द जैसे लिखा जाता है उसी रुप में पढ़ा जाता है जैसे अंग्रेजी भाषा में knife का उच्चारण नाइफ होता है।
६.हिंदी में Small और Capital जैसा कुछ नहीं होता बल्कि प्रत्येक वर्ण का समान स्थान है।
७.प्रत्येक संबंध के लिए अलग-अलग शब्द हैं।
जैसे-मामा,नाना,चाचा, दादा,भाई आदि
८.हिंदी निरन्तर अपना शब्दकोश विस्तारित करती है। आवश्यकतानुसार दूसरी भाषाओं के प्रचलित शब्दों को अपने शब्दकोश में स्थान प्रदान करती है।
आइए हम सब भारतवासी संकल्प लें कि मातृ तुल्य मातृभाषा का अधिकाधिक प्रयोग कर हिंदी को उचित सम्मान प्रदान करें क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति 'डॉ0 राजेंद्र प्रसाद’ जी ने कहा है कि
"जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह कभी समृद्ध नहीं हो सकता"।

बहुत सही भैया... 👍👍👍
ReplyDeleteअति सुन्दर 👌👌
ReplyDeleteअति सुन्दर Sir
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