"भारत के देदीप्यमान सूर्य स्वामी विवेकानंद"
हमारी भारत माता वीरता, त्याग, शौर्य, बलिदान और सन्तों की भूमि रही है। जहां समय-समय पर अनेक पुण्यात्माओं ने जन्म लेकर यहां के जनमानस को कृतार्थ किया है।
इसी कड़ी में वर्तमान परिस्थितियों में सर्वाधिक प्रासांगिक व्यक्तित्व स्वामी विवेकानंद हैं। जिन्होंने ने अपने तप, ब्रह्मचर्य, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गुरुभक्ति के द्वारा जो श्रेष्ठ सिद्धांत दिए वो समूचे विश्व के लिए पथप्रदर्शक बनकर मार्गदर्शन कर रहे हैं।आज एक शताब्दी के बाद भी वे अपने विचारों के माध्यम से प्रत्येक सकारात्मक व्यक्ति के अन्दर जीवन्त हैं।
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि आध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की कई शाखाएं स्थापित की। उनका विश्वास था कि भारत की भूमि धर्म एवं दर्शन की भूमि है। यहां बड़े-बड़े महात्माओं व ऋषियों का जन्म हुआ, यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है।
स्वामी जी ने अपने धर्म,दर्शन के बारे में कहा है कि- पृथ्वी पर हिन्दू धर्म के समान कोई भी अन्य धर्म इतने उदात्त रूप में मानव की गरिमा का प्रतिपादन नहीं करता।’’
’’मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ जिसने संसार को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों ही शिक्षा दी है।’’
तीन वर्ष तक वे अमेरिका में रहे। उनके ज्ञान और बोलने की शैली को देखते हुए अमेरिकी मीडिया ने उन्हें ‘साइक्लॉनिक हिन्दू’ का नाम दिया।
ऐसे महान युगपुरुष को उनकी पुण्यतिथि पर हम भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 🙏🙏

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ReplyDeleteयुगों-युगों तक जिनकी ओजस्विता गुंजायमान रहेगी, ऐसे दैदीप्यमान पुण्यात्मा को सादर नमन
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